लोग नशा क्यों करते हैं
लोग नशा क्यों करते हैं
अक्सर लोग अलग अलग तरह का नशा करते है।
पर हानिकारक होने की जानकारी के बाद भी लोग नशा करते है।
नशे की वस्तु अक्सर कड़वी होती है खाने व पीने में कुछ खास स्वाद भी नहीं होता ।
फिर भी हमारा दिमाग उसकी मांग करता है कि लोग अपनी कमाई का ज्यादा हिस्सा इसमें खर्च करने के लिए तैयार रहते है।
क्या ऐसी कोई खास बात है नशे में।
क्या इसे ठीक से समझना चाहिए।
अगर कोई व्यक्ति नशा शुरू करता है और पहली बार उसे चखता है उसे वह अक्सर स्वाद में अच्छा नहीं लगता। परन्तु वह अपने लोगों के साथ मिल कर रहने के लिए, या फिर दोस्तों के बीच अपनी एक पहचान बनाने के लिए, या फिर अपने को साबित करने के लिए नशा शुरू करता है,
यह तो एक शुरुआत होती है परन्तु कुछ दिनों बाद उसे यह नशा अच्छा लगने लगता है और वह कुछ समय के लिए ही सही एक आनंद की प्राप्ति के लिए नशा करने लगता है।
यह क्षणिक सुख या आनंद के लिए वह अपने शरीर की चिंता किए बिना नशा करने लगता है।
सुख और आनंद दो अलग शब्द हैं इसे अलग अलग ही समझना पड़ेगा।
इंद्रियों को जो अच्छा लगे उसे सुख कहते है।
सुख को समझने के लिए कष्ट को समझते है। कष्ट, जैसे चोट लगने में दर्द होता है यह कष्ट है। इसका विपरीत सुख है।
जैसे मिर्ची खाने से जो जलन होती है कष्ट है परन्तु व्यक्ति को आनंद की अनुभूति होती है।
क्योंकि मिर्ची में एक ऐसा पदार्थ है जो कि शरीर के लिए आवश्यक है जिसे हम आज विटामिन सी के नाम से जानते है । शरीर में दिमाग इसकी आपूर्ति के लिए इसे आनंद में बदल देता है।
तो क्या नशे में भी कुछ होता है जिसकी शरीर में उसकी आवश्यकता है। अगर आज तक की बायोलॉजी के ज्ञान से समझे तो तो ऐसा कुछ खास नहीं पाया जाता किसी भी नशीले पदार्थ में। कुछ को छोड़ देते है अपवाद की तरह। दारू को लें तो इसमें खास ऐसा कुछ नहीं है जो कि शरीर में किसी तरह की आपूर्ति करे।
परन्तु यह कुछ तो ऐसा करता है कि लोग इसे पीते है वह भी बार बार।
मेरे कुछ दोस्तों के कॉमेंट्स को देखते है
1. ,"So that refresh ho jaye phir se"
2. ,,"पहले पिलाओ तब बताएंगे"
3. "I Love it "
4. "It helps in subsidising or forgetting your sorrows for the moment"
5. "Bilkul sahi javab.. Agar research sahi se Karni hain to Pilani padegi"
6. ," Yes Pilani to padegee"
7. "सभी लोग बरेली आ जाओ अजय की जगह मैं पिला देता हूं सबको और फिर वही पर रिसर्च भी कर लेंगे कि लोग शराब क्यों पीते हैं"
अगर हम प्रत्येक कमेंट को ध्यान से देखे तो पता चलता है कि हर व्यक्ति ऐसे आनंद की खोज में है जो उसे आम तौर में नहीं प्राप्त है।
,"So that refresh ho jaye phir se" इन्हें अपनी जीवन के दौड़ धूप से थकावट महसूस होती है और ये शरीर और दिमाग को कुछ आराम देने के लिए क्षणिक आनंद का अनुभव करना चाहते है। जो कि इन्हें अपने शरीर को हानि पहुंचा कर भी स्वीकार है।
माफ करना दोस्त मैं गलत भी हो सकता हूं।
"I Love it ",
इन्हें अपने जीवन में प्रेम की अनुभूति की चाह है, जो आनंद इन्हें प्रेम से मिलता है उसी प्रकार का आनंद इन्हें दारू पी कर भी प्राप्त होता है। तो क्या इसके लिए शरीर को भी हानि पहुंचा कर आनंद प्राप्त करने के लिए दिमाग तैयार है।
"It helps in subsidising or forgetting your sorrows for the moment"
इन्हें कुछ समय के लिए आनंद प्राप्त होता है और ऐसी अनुभूति होती है कि दुख समाप्त हो गए है, वास्तव में भौतिक अवस्था में कोई बदलाव नहीं है, यहां यह पता चलता है कि सभी कष्टों की अनुभूति से जो कि दुख का कारण बनी है दारू पीने के बाद वह एक ऐसी अवस्था में आ जाते है जहां इन्हें आनंद का अनुभव होता है, यह संभव है जिस कारणवश दुख हुआ है वह अनुभव और तीव्र हो जाता हो परन्तु कष्ट न पहुंचा कर अब आनंद का अनुभव कर रहा है जिस प्रकार किसी घोर दुख के कारण व्यक्ति रोता है और फिर उसका कष्ट समाप्त हो जाता है। इसी आनंद के लिए दारू पी रहे हो।
"पहले पिलाओ तब बताएंगे"
"Bilkul sahi javab.. Agar research sahi se Karni hain to Pilani padegi"
"Yes Pilani to padegee"
इनके आनंद प्राप्त करने के बाकी सभी कारण समाप्त हो गए है, ये बाकी भौतिक अवस्था के आनंद से संतुष्ट नहीं है , दारू पी कर एक ऐसी अवस्था में पहुंच जाते है कि उससे बाहर नहीं आना चाहते इसलिए किसी भी दुख सुख या प्रेम को पाने के लिए नहीं बल्कि एक ऐसी अनुभूति जो इन्हें और किसी भी वस्तु या कार्य से नहीं मिलती, इनके दिमाग ने एक तरीका ढूंढ निकला है आनंद प्राप्त करने के लिए, वस्तुतः यह और कोई तरीका ढूंढना भी नहीं चाहते क्योंकि दिमाग को जब कोई मेहनत किए बिना ही आनंद प्राप्त हो रहा है तो क्यों और कोई तरीका ढूंढे, इसके लिए शरीर का बलिदान देने के लिए दिमाग तैयार है।
"सभी लोग बरेली आ जाओ अजय की जगह मैं पिला देता हूं सबको और फिर वही पर रिसर्च भी कर लेंगे कि लोग शराब क्यों पीते हैं"
इन्हें अपने दोस्तों के साथ में आनंद की अनुभूति होती है इस कारणवश उनके साथ दारू पीते है और नशा इस अनुभूति की तीव्रता को बढ़ा देता है।
सभी कॉमेंट्स से शायद यही पता चलता है कि शरीर को कष्ट देकर और इसका बलिदान देकर भी मनुष्य आनंद की अनुभूति करना चाहता है।
अलग अलग नशे से अलग अलग अनुभूति होती है, और फिर दिमाग एक आसान तारिका ढूंढ लेता है आनंद प्राप्त करने के लिए,
यह क्या परमानंद की खोज में हैं। क्या यह आनंद शरीर से ज्यादा उच्च अवस्था है जिसके लिए शरीर का बलिदान दिया जा सके।
या फिर हमारा दिमाग आलसी है कि वह नए तरीके नहीं खोजना चाहता और एक आसान मार्ग पर ही चलना चाहता है।
यह एक शोध का विषय है।
सही बात है पर इतने ज्ञान के बाबजूद भी लोग नहीं छोड़ पाते । शायद कुछ तो बात होगी इस नशे में जो नहीं समझ आती
ReplyDelete